বুধবার, ৯ জুন, ২০২১

किम जोंग उन संग मिलकर परमाणु-मिसाइल ताकत बढ़ा रहा पाकिस्‍तान? 1718 जहाजों से बढ़ा रहस्‍य

इस्‍लामाबाद परमाणु बम और महाविनाशक मिसाइलों से लैस उत्‍तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग के साथ भारत के धुर विरोधी देश पाकिस्‍तान की दोस्‍ती लगातार बढ़ती जा रही है। उत्‍तर कोरिया और पाकिस्‍तान की इस नापाक दोस्‍ती में चीन एक मजबूत कड़ी की भूमिका निभा रहा है। इस बीच भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि उत्‍तर कोरिया के 1718 जहाजों ने पिछले तीन साल में दुनिया के कई देशों का रहस्‍यमय दौरा किया है। ऐसे में यह संदेह बढ़ता जा रहा है कि कहीं उत्‍तर कोरिया पाकिस्‍तान को लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की तकनीक और परमाणु बम बनाने की टेक्‍नॉलजी में मदद तो नहीं कर रहा है। यह आशंका ऐसे समय पर जताई जा रही है जब गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पिछले साल एक चीनी जहाज Dai Cui Yun से भारतीय जांच एजेंसियों ने आटोक्‍लेव बरामद किया था। आटोक्‍लेव को मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है। जांच में पता चला था कि चीनी जहाज चोरी से पाकिस्‍तान के कराची बंदरगाह जा रहा था। जी न्‍यूज की रिपोर्ट के मुताबिक यह आटोक्‍लेव पाकिस्‍तान की शाहीन मिसाइल के लिए इस्‍तेमाल किए जाने वाला था। उत्‍तर कोरिया के 1718 जहाजों के रहस्‍यमय दौरा उत्‍तर कोरिया-चीन- पाकिस्‍तान के बीच हथियारों और उनकी तकनीक की तस्‍करी को लेकर पहले भी खबरें आती रही हैं। पाकिस्‍तानी परमाणु हथियारों के जन्‍मदाता एक्‍यू खान पर उत्‍तर कोरिया को परमाणु तकनीक देने का आरोप लगा था। ऐसे में उत्‍तर कोरिया के 1718 जहाजों के रहस्‍यमय दौरा करने से यह संदेह बढ़ता जा रहा है कि कहीं दोनों देश फिर से परमाणु और मिसाइल तकनीक पर एक-दूसरे की मदद तो नहीं कर रहे हैं। उत्‍तर कोर‍ियाई जहाजों की इस मूवमेंट पर अमेरिका ने भी चिंता जताई है। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि उत्‍तर कोरिया के 1718 जहाजों में से कितने चीन या पाकिस्‍तान गए और इनमें क्‍या सामान लदा हुआ था। इससे पहले जून 2020 में आई एक जर्मन रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन, पाकिस्‍तान और उत्‍तर कोरिया के बीच परमाणु, जैविक और रासायनिक हथियारों को लेकर गठजोड़ चल रहा है। दोस्‍ती का मकसद नई हथियार प्रणाली को विकसित करना चीन कराकोरम हाइवे के जरिए पाकिस्‍तान तक परमाणु सामग्री भेजता रहता है। जर्मन‍ रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दोस्‍ती का मकसद हथियारों के जखीरे को पूरा करना, उनकी रेंज को बढ़ाना, उनकी क्षमता को सुधारना और नई हथियार प्रणाली को विकसित करना है। ये तीनों देश जर्मनी से अवैध तरीके से जरूरी तकनीक हासिल करने का भी प्रयास कर रहे हैं।


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