साल 2024 में अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA अपने ऐस्ट्रोनॉट्स को चांद पर भेजने के लिए Artemis मिशन पर काम कर रही है। यह मिशन सबसे खास इसलिए है क्योंकि पहली बार किसी महिला को चांद पर भेजा जाएगा। इसके साथ ही इस बार स्पेससूट भी बेहद खास होने वाले हैं। दशकों बाद इंसान को अंतरिक्ष में इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन के अलावा कहीं लैंड कराया जा रहा है। ऐसे में मॉडर्न टेक्नॉलजी से बने ये सूट उन्हें आराम से अपना काम कर पाने में मदद करेंगे। (Photo : NASA)Artemis Lunar Mission Special Suits: चांद पर अपने ऐस्ट्रोनॉट्स भेजने के लिए NASA ने खास स्पेससूट तैयार किए हैं। इन पर अभी काम चल रहा है और 300 मिलियन डॉलर खर्च किए जा चुके हैं।

साल 2024 में अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA अपने ऐस्ट्रोनॉट्स को चांद पर भेजने के लिए Artemis मिशन पर काम कर रही है। यह मिशन सबसे खास इसलिए है क्योंकि पहली बार किसी महिला को चांद पर भेजा जाएगा। इसके साथ ही इस बार स्पेससूट भी बेहद खास होने वाले हैं। दशकों बाद इंसान को अंतरिक्ष में इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन के अलावा कहीं लैंड कराया जा रहा है। ऐसे में मॉडर्न टेक्नॉलजी से बने ये सूट उन्हें आराम से अपना काम कर पाने में मदद करेंगे। (Photo : NASA)
आराम और काम, दोनों जरूरी

स्पेससूट ऐस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष की कंडीशन्स से तो बचाते ही हैं, उन्हें आरामदायक भी होना पड़ता है। CNN की रिपोर्ट में मेगन मार्पल्स ने बताया है कि स्पेससूट पहनने में चार घंटे तक लग जाते हैं। उन्होंने स्मिथसोनियन इंस्टिट्यूशन के नैशनल एयर ऐंड स्पेस म्यूजियम की इंटरनैशनल स्पेस प्रोग्राम और स्पेससूट की क्यूरेटर कैथलीन लूईस के हवाले से बताय है कि सूट पहनने में किसी की मदद चाहिए होती है। स्पेसवॉक पर जाने से पहले ऐस्ट्रोनॉट्स को एक-एक पुर्जा चेक करना होता है। इसके लिए सूट का फंक्शनल होना ही सबसे अहम है।
बेहद खास हैं स्पेससूट

स्पेसवॉक के दौरान धरती पर बैठी टीम ऐस्ट्रोनॉट्स से कनेक्टेड रहती है। NASA के मुताबिक एक स्पेसूट में आधा दर्जन हिस्से होते हैं और इसकी 16 लेयर तक हो सकती हैं। Artemis मिशन पर जाने वाले ऐस्ट्रोनॉट्स के सूट को exploration extravehicular mobility unit या xEMU नाम दिया गया है। इसे पहले ISS पर टेस्ट किया जाएगा। xEMU प्रेशर गार्मेंट डिवेलपमेंट के डेप्युटी लीड रिचर्ड रोड्स का कहना है कि इसका खास हिस्सा एक कूलिंग गार्मेंट है जो ऐस्ट्रोनॉट के शरीर का तापमान बनाए रखेगा। इसके अलावा इस बार दस्तानों पर भी खासा ध्यान दिया गया है जो पहले के समय में परेशानी का कारण बन जाया करते थे।
अपने आप में 'स्पेसक्राफ्ट'

हर सूट में एक पोर्टेबल लाइफ सपॉर्ट सिस्टम है जिसमें कूलिंग गारमेंट के लिए पानी का टैंक, कार्बन डायऑक्साइड हटाने के लिए सिस्टम और दूसरी चीजें हैं। इसमें एक टू-वे रेडियो सिस्टम भी है। हर सूट पर अलग रंग की पट्टियां होती हैं जिससे ऐस्ट्रोनॉट की पहचान की जा सकती है। रोड्स ने बताया है कि चार साल में NASA ने xEMU को बनाने के लिए 30 करोड़ डॉलर खर्च कर दिए हैं। रोड्स का कहना है कि इस सूट में ऐस्ट्रोनॉट को काम करने में आराम भी मिलना चाहिए लेकिन चांद के पर्यावरण से सुरक्षा भी होनी चाहिए।
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