সোমবার, ২১ জুন, ২০২১

चीन की नाक के नीचे पहुंचा भारतीय नौसेना का ऐरावत, साउथ चाइना सी में योग से दिया कड़ा संदेश

कैमरान्‍ह बे (वियतनाम) साउथ चाइना सी से लेकर अरब सागर तक फुफकार रहे चीनी ड्रैगन को भारतीय नौसेना ने अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस पर एक कड़ा संदेश दिया है। इंडियन नेवी के युद्धपोत आईएनएस ऐरावत पर सवार जवानों ने वियतनाम के कैमरान्‍ह बे इलाके में योग किया। नौसेना ने बताया कि इस युद्धपोत को कैमरान्‍ह बे इलाके में तैनात किया गया है। भारतीय युद्धपोत ऐसे समय पर साउथ चाइना सी पहुंचा है जब चीन का अपने पड़ोसी देशों के साथ विवाद काफी बढ़ गया है। साथ ही चीनी जहाजों की घुसपैठ लगातार हिंद महासागर में बढ़ती जा रही है। भारत ने चीन को दिखा दिया है कि अगर वह उसके प्रभाव के क्षेत्र हिंद महासागर में घुसपैठ कर सकता है तो भारतीय जंगी जहाज भी साउथ चाइना सी की गहराईयों को नापने के लिए कभी भी पहुंच सकते हैं। इससे पहले भारत ने गलवान घाटी हिंसा के बाद अपने एक युद्धपोत को दक्षिण चीन सागर में तैनात कर दिया था। इस युद्धपोत को उस इलाके में तैनात किया गया है, जहां चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना ने किसी भी अन्य फोर्स की मौजूदगी पर ऐतराज जताया था। भारतीय युद्धपोत की तैनाती से बेचैन हो गई थी चीनी नौसेना दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत की तत्काल तैनाती से चीनी नौसेना में बेचैन हो गई थी। चीनी नौसेना ने भारतीय पक्ष के साथ डिप्लोमैटिक लेवल की बातचीत में भारतीय युद्धपोत की उपस्थिति के बारे में शिकायत की थी। सूत्रों के मुताबिक दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना ने भी अपने विध्वंसक और फ्रिगेट तैनात किए थे। तैनाती के दौरान भारतीय युद्धपोत लगातार अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए था। किसी भी सार्वजनिक चकाचौंध से बचने के लिए पूरे मिशन को बहुत ही गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया था। यही नहीं भारतीय नौसेना ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास मलक्का स्ट्रेट्स में चीनी नौसेना की गतिविधि पर नजर रखने के लिए अपने फ्रंटलाइन जहाजों को तैनात किया था। चीनी नौसेना इसी रास्ते से हिंद महासागर में प्रवेश करती है। इसके अलावा कई चीनी जहाज भी तेल या मर्चेंट शिपमेंट्स के साथ अन्य महाद्वीपों से आकर इसी रास्ते से गुजरते हैं। भारतीय नौसेना ने इसके जरिए ड्रैगन को संदेश दिया था कि वह पूर्वी या पश्चिमी मोर्चे पर विरोधियों द्वारा किसी भी दुस्साहस का जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम है। दक्षिणी चीन सागर को लेकर चीन का पड़ोसियों से गंभीर विवाद चीनी नौसेना के जहाजों की मलक्का स्ट्रेट्स से लेकर हिंद महासागर में होने वाली मूवमेंट पर नजर रखने के लिए भारतीय नौसेना अंडरवाटर जहाजों, अन्य मानवरहित सिस्टमों और सेंसरों को तुरंत हासिल कर तैनात करने की योजना बना रही है। इसके अलावा भारतीय नौसेना जिबूती इलाके के आसपास मौजूद चीनी जहाजों पर भी नजर बनाए रखे हुए है। नौसेना ने राष्ट्रीय हितों के लिए आसपास के इलाके में अपने असेट्स तैनात किए हैं। दरअसल, चीन के लिए दक्ष‍िण चीन सागर उसकी दुखती रग है। चीन का दावा है कि दक्षिणी चीन सागर का अधिकांश हिस्सा उसके क्षेत्र में आता है। इसी वजह से उसका वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया और फ‍िलीपीन्‍स जैसे देशों के साथ गंभीर विवाद चल रहा है। इसी तनाव को देखते हुए अमेरिकी नौसेना लगातार इस इलाके में गश्‍त लगाती रहती है ताकि अगर जरूरत पड़े तो ड्रैगन के दुस्‍साहस का तत्‍काल कठोरता के साथ जवाब दिया जा सके। दक्षिण चीन सागर इसलिए खास दरअसल, दक्षिण चीन सागर में जिस क्षेत्र पर चीन की नजर है वह खनिज और ऊर्जा संपदाओं का भंडार है। चीन का दूसरे देशों से टकराव भी कभी तेल, कभी गैस तो कभी मछलियों से भरे क्षेत्रों के आसपास होता है। चीन एक 'U' शेप की 'नाइन डैश लाइन' के आधार पर क्षेत्र में अपना दावा ठोकता है। इसके अंतर्गत वियतनाम का एक्सक्लूसिव इकनॉमिक जोन (EEZ), परासल टापू, स्प्रैटली टापू, ब्रूने, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलिपीन और ताइवान के EEZ भी आते हैं। हेग स्थित एक ट्राइब्यूनल ने फिलिपील द्वारे दर्ज किए गए केस में 2016 में कहा था कि चीन का इस क्षेत्र पर कोई ऐतिहासिक अधिकार नहीं है और 1982 के UN Convention on the Law of the Sea के बाद इस लाइन को खत्म कर दिया गया था। वियतनाम को तेल उत्पादन में घाटा वर्ष 2019 में चीन और वियतनाम के जहाज कई महीनों तक वियतनाम के EEZ में आमने-सामने रहे जब चीन के रिसर्च वेसल ने ऐसी जगह का सीस्मिक सर्वे (Sesmic Survey) किया जिसमें वियतनाम के तेल के ब्लॉक भी आते हैं। तनावपूर्ण स्थिति की वजह से वियतनाम के तेल उत्पादन पर असर पड़ा है। साथ ही यहां काम करने वाले रूस के Rosneft और स्पेन के Repsol के ऑपरेशन पर भी असर पड़ा है। कंसल्टंसी फर्म Wood Mackenzie के रिसर्च डायरेक्टर ऐंड्रू हारवुड का कहना है, 'हम देख रहे हैं कि वियतनाम में तेल और गैस निवेश की दिलचस्पी में कमी आई है। तनाव बढ़ने से हालात सुधरेंगे नहीं।'


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