काठमांडू नेपाल में जारी राजनीतिक उठापठक के बीच विपक्षी के एक प्रांतीय विधायक ने प्रधानमंत्री को जान से मारने की धमकी दी है। धमकी देने वाले नेपाली कांग्रेस के नेता नरोत्तम बैद्या बागमती प्रांत से विधायक हैं। उन्होंने पीएम ओली के हालिया कैबिनेट विस्तार की आलोचना करते हुए उसे असंवैधानिक करार दिया। इस दौरान नेताजी का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने पीएम ओली को ही जान से मारने की धमकी दे डाली। विधायक ने नाथूराम गोडसे का किया जिक्र बैद्या ने हवा में हाथ उठाते हुए कहा कि ओली इस तरह से आगे बढ़ रहे हैं कि वे सत्ता में रहने और अपनी कुर्सी को बचाने के लिए शासन के हर पहलू से समझौता कर रहे हैं। अगर हम ओली को छोड़ देते हैं तो देश गिर जाएगा। उन्होंने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का जिक्र करते हुए देश को बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर कोई तैयार नहीं हुआ तो इसे मैं ही करूंगा। ओली की पार्टी ने दी तीखी प्रतिक्रिया विधायक की धमकी के बाद से नेपाल में राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। विधायक के बयान की खुद उनकी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने भी आलोचना की है। इसके अलावा ओली की पार्टी सीपीएन (यूएमएल) ने विधायक पर कार्रवाई की मांग की है। नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता बिशोप्रकाश शर्मा ने शुक्रवार देर शाम नरोत्तम बैद्या से अपना बयान वापस लेने के लिए कहा। नेपाली कांग्रेस ने बयान से पल्ला झाड़ा उन्होंने कहा कि किसी को भी अपना विवेक नहीं खोना चाहिए चाहे वह सड़क पर हो या संसद में। आपा खोने के बाद दिए गए बयानों को वापस लेना चाहिए और उस पर आत्म-मंथन की जानी चाहिए। पार्टी इस तरह के बयानों को कवर करने का कोई प्रयास नहीं करेगी। कार्यवाहक पीएम रहते हुए ओली ने दूसरी बार किया मंत्रिमंडल विस्तार केपी शर्मा ओली ने देश में जारी राजनीतिक संकट और व्यापक आलोचनाओं के बीच गुरुवार को एक सप्ताह में दूसरी बार अपनी कैबिनेट का विस्तार किया था। पिछले महीने सदन में विश्वासमत प्राप्त करने में विफल रहने के बाद ओली अल्पमत की सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी कैबिनेट में 7 कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री को शामिल किया था। 4 जून को भी किया था मंत्रिमंडल विस्तार सत्ता पर अपनी पकड़ बनाने तथा भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के कदम के तहत 69 वर्षीय ओली ने गत शुक्रवार यानी 4 जून को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए आठ काबीन मंत्रियों और दो नए राज्य मंत्रियों को शामिल किया था। इसमें मधेसियों के आधार वाली जनता समाजवादी पार्टी को तरजीह दी गई थी। ओली ने फेरबदल के तहत तीन उपप्रधानमंत्री नियुक्त किए थे जिनमें से दो मधेसी समुदाय से हैं।
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