वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने भारतीय मूल की वकील और कार्यकर्ता को की प्रमुख के तौर पर नामित किया है। कार्मिक प्रबंधन कार्यालय, अमेरिका के बीस लाख से अधिक सिविल सेवा अधिकारियों के प्रबंधन का कामकाज देखता है। अमेरिका में इस कार्यालय को काफी ताकतवर माना जाता है। इसी कार्यालय के जरिए टॉप क्लास के सरकारी अधिकारियों की भर्ती-रिटायरमेंट और ट्रांसफर-पोस्टिंग का काम होता है। ने वोट देकर सीनेट की दिलाई मंजूरी 49 साल की किरण आहूजा इस पद पर पहुंचने वाली पहली भारतीय मूल की महिला हैं। इनके नाम को मंजूरी देने के लिए सीनेट में हुई वोटिंग बराबरी की स्थिति में आ गई थी। जिसके बाद उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने किरण के पक्ष में अपना वोट देकर उन्हें जीत दिला दी। सीनेट में 50-50 मतों की स्थिति के बाद हैरिस ने मंगलवार को आहूजा के पक्ष में वोट डाला था। अमेरिका के 20 लाख टॉप अधिकारियों की बनीं 'बॉस' कार्मिक प्रबंधन कार्यालय अमेरिका की एक संघीय एजेंसी है जो देश के 20 लाख से अधिक लोक सेवकों का प्रबंधन करती है। आहूजा ने 2015 से 2017 तक कार्मिक प्रबंधन कार्यालय के निदेशक के चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर काम किया था। उन्हें, लोक सेवा और गैर लाभकारी क्षेत्र में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। आहूजा अभी परोपकारी संस्थानों के एक क्षेत्रीय नेटवर्क फिलान्थ्रोपी नॉर्थवेस्ट की सीईओ हैं। जॉर्जिया में पली-बढ़ी हैं किरण आहूजा उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग में नागरिक अधिकार वकील के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। उनका पालन-पोषण जॉर्जिया में हुआ और उन्होंने स्पेलमैन कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक किया और जॉर्जिया विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली। ओबामा-बाइडन प्रशासन के दौरान उन्होंने वाइट हाउस के एक कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक के तौर पर छह साल तक सेवा दी थी। वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि आहूजा, सिविल सेवाओं पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को पलट सकती हैं।
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