लंदन ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने के बाद व्यापार नियमों को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों ने कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि कई साल तक चर्चा और बहस के बाद दिसंबर में तय की गईं चीजों की जून में फिर से समीक्षा की मांग गंभीर नहीं हो सकती है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस मुद्दे पर एक-दूसरे के साथ होने की बात कही है। दरअसल, उत्तरी आयरलैंड को लेकर ब्रेग्जिट के बाद व्यापार पर फैसला अभी गतिरोध का सामना कर रहा है। क्यों अहम है उत्तरी आयरलैंड? उत्तरी आयरलैंड (Northern Ireland) अकेला ऐसा हिस्सा है यूरोपियन यूनियन में शामिल आयरलैंड से उसे जोड़ता है। इसकी वजह से ब्रेग्जिट विवाद के बीच वह एक अहम कड़ी बना है। आयरलैंड की सीमा खुली रहने से शांति व्यवस्था के कायम रहने की संभावना रहती है। इस रास्ते से लोग भी आते जाते हैं और व्यापार भी आराम से होता है। उत्तरी आयरलैंड के लोगों के लिए आयरलैंड और ब्रिटेन दोनों को जाने का यह आसान तरीका है। अब यहीं ब्रेग्जिट के बाद से विवाद पैदा हो गया है। ब्रेग्जिट का क्या असर? ब्रिटेन की सरकार जिस तरह से ब्रेग्जिट () चाह रही है, उसकी वजह से व्यापार में नए बैरियर खड़े हो सकते हैं। ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन इस बात पर सहमत हुए कि आयरलैंड में सीमा नहीं रखी जा सकती है क्योंकि इससे शांति प्रक्रिया पर असर पड़ेगा। इसकी जगह एक 'आइरिश सी बॉर्डर' (Northern Ireland Protocol) बनाया गया जिसक जरिए आयरलैंड की सीमा पर कस्टम चेक करने की जरूरत नहीं होती और उत्तरी आयरलैंड यूरोप के सिंगल मार्केट और ब्रिटेन के इंटरनल मार्केट का हिस्सा बना रहता है। आयरलैंड का व्यापार खतरे में? हालांकि, ब्रिटेन का एक तबका ऐसा है जिसका मानना है कि उत्तरी आयरलैंड की ब्रिटेन में जगह कमजोर हो रही है और इसस आइरिशन संगठन की मांगें तेज हो रही हैं। 31 दिसंबर को यूरोपियन यूनियन से आर्थिक रूप से अलग होने के बाद उत्तरी आयरलैंड को भी कई परेशानियां देखनी पड़ीं। कोरोना की महामारी के चलते बाजारों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। कुछ वक्त के लिए सीमा स्टाफ को पोर्ट्स से हटाने की जरूरत तक पड़ गई। ब्रिटिश PM बोरिस जॉनसन के खिलाफ भी नाराजगी है जिन्होंने पहले कहा था कि ब्रेग्जिट की वजह से व्यापार पर ज्यादा कड़े नियम नहीं लगाए जाएंगे। क्या है ताजा विवाद? ताजा विवाद उत्तरी आयरलैंड और ग्रेट ब्रिटेन के बीच मीट () के व्यापार को लेकर है। हाल ही में खबरें आई थीं कि जून के आखिर में ग्रेस पीरियड खत्म होने के बाद ब्रिटेन से उत्तरी आयरलैंड आने वाले मीट पर नियम लगाने में ब्रिटेन देरी कर सकता है। पीएम के आधिकारिक प्रवक्ता ने भी कहा कि उत्तरी आयरलैंड से मीट पर रोकने के पीछे कोई ठोस कारण नहीं है। उनका कहना है कि इससे उत्तरी आयरलैंड के लोगों पर असर पड़ेगा। वहीं, EU ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया है।
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