पेइचिंग/लंदन ब्रिटेन में इकट्ठा हुए जी-7 देशों ने चीन पर कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाया था। कोरोना वायरस कहां पैदा हुआ, इसके जवाब से लेकर हॉन्ग-कॉन्ग और शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों तक के लिए चीन को कठघरे में खड़ा किया गया। जाहिर है ड्रैगन को यह नागवार गुजरा है। लंदन में चीनी दूतावास ने समिट के आखिर में जारी किए गए बयान के प्रति 'कड़ी असंतुष्टि' जताई है और शिनजियांग, हॉन्ग-कॉन्ग, ताइवान जैसे मुद्दे उठाने का विरोध किया है। यही नहीं, चीन का दावा है कि उसके खिलाफ तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है जिससे 'अमेरिका जैसे कुछ देशों के बुरे इरादे जाहिर होते हैं।' 'चीन शांतिप्रिय लेकिन एक सीमा तक' चीनी दूतावास का कहना है कि कोरोना की महामारी अभी भी जारी है और वैश्विक अर्थव्यवस्था खराब हालत में है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकता और सहयोग की जरूरत है न कि अलगाववाद के बीज बोने वाली राजनीति की। दूतावास ने चेतावनी दी है कि चीन एक शांतिप्रिय देश है जो सहयोग को बढ़ावा देता है लेकिन उसके लिए भी तय सीमा है। बयान में कहा गया है, 'चीन के आंतरिक मुद्दों में दखल नहीं दिया जाना चाहिए, चीन की छवि खराब नहीं करनी चाहिए, चीन के हितों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।' इसके आगे कड़े लहजे में चेतावनी दी गई है, 'हम अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के हितों की सुरक्षा करेंगे और किसी भी तरह के अन्याय के खिलाफ मजबूती से लड़ेंगे।' दूतावास का कहना है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। जो बाइडेन ने की थी मोर्चाबंदी की कोशिश? समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों ने कुछ हद तक उनका समर्थन भी किया। बाइडेन चीन के साथ आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धा करने के लिए साथी लोकतांत्रिक नेताओं को अधिक एकजुट मोर्चा पेश करने पर राजी करना चाहते थे। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक सभी देशों ने बाइडेन का कई मुद्दों पर साथ दिया लेकिन चीन को लेकर ठोस सहमति नहीं बन सकी। खासकर जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और इटली के प्रधानमंत्री मारियो डराघी और दूसरे नेताओं को चिंता थी कि बयान को चीन को उकसाने के तौर पर न देखा जाए। 'NATO देशों के लिए प्रतिद्वंदी नहीं चीन' वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सोमवार को ब्रसेल्स में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि NATO के नेता चीन को उस तरह के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर नहीं देखते, जिस तरह से यह सैन्य संगठन रूस को देखता है। हालांकि, वे चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क हैं। उन्होंने कहा, 'मैं नहीं समझता कि इस समय मौजूद कोई भी व्यक्ति आज चीन के साथ एक नए शीत युद्ध को शुरू करना चाहता है।'
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