বুধবার, ২৭ অক্টোবর, ২০২১

हिटलर ने दिखाई थी अंतर‍िक्ष की राह, नाजी रॉकेट ने खींची थी धरती की पहली तस्‍वीर

बॉन अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यात्री अब तक अंतरिक्ष से 9 लाख से ज्‍यादा तस्‍वीरें ले चुके हैं। ये तस्‍वीरें अब दुनियाभर में पहचान बन चुकी हैं लेकिन क्‍या आपको पता है कि धरती की पहली तस्‍वीर अमेरिका या रूस नहीं बल्कि जर्मन तानाशाह एडोल्‍फ हिटलर के नाजी रॉकेट वी-2 से ली गई थीं। वी-2 रॉकेट ने अंतरिक्ष से यह ऐतिहासिक तस्‍वीर 24 अक्‍टूबर, 1946 को ली थी। ब्‍लैक एंड वाइट यह तस्‍वीर पूरी पृथ्‍वी की नहीं थी, बल्कि धरती का कुछ ही हिस्‍सा इसमें दिख रहा था। बाद के दिनों में जब तकनीक और ज्‍याद उन्‍नत हुई तब धरती की पूर्ण तस्‍वीर को खींचा गया। अमेरिका के नैशनल एयर एंड स्‍पेस म्‍यूजियम के अधिकारी माइकल नेउफेल्‍ड ने इनवर्स वेबसाइट से बातचीत में कहा कि यह साल 1946 के लिए बड़ी उपलब्धि थी। इसे बड़ी खबर माना गया था।' कहा जाता है कि सुपरसोनिक स्‍पीड से चलने वाला यह दुनिया का पहला हथियार था। नाजी रॉकेट से अमेरिका ने खींची थी यह तस्‍वीर यह तस्‍वीर किस तरह से खींची गई, इसकी कहानी भी बहुत दिलचस्‍प है। यह तस्‍वीर एक 35 एमएम के फिल्‍म कैमरा को हिटलर के वी-2 रॉकेट के ईंधन टैंक के बीच में रखकर खींची गई थी। अमेरिका ने विश्‍वयुद्ध के खात्‍मे के बाद जर्मनी के कुछ वी-2 के रॉकेट पर कब्‍जा कर लिया था। इसके बाद इन्‍हीं रॉकेट का वाइट सैंड मिसाइल रेंज से परीक्षण किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक न्‍यू मैक्सिको के रेगिस्‍तान से इस एकमात्र रॉकेट लॉन्‍च के बाद दुनिया में कोल्‍ड वॉर, स्‍पेस रेस और अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग शुरू हो गए। अमेरिकी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को रॉकेट लॉन्‍च के बारे में जानकारी थी लेकिन द्वितीय विश्‍वयुद्ध की समाप्ति के बाद नाजी शासन का अंत हो गया। इसके बाद कई जर्मन वैज्ञानिक वी-2 रॉकेट की तकनीक को लेकर अमेरिका चले गए। हिटलर इस रॉकेट की मदद से एक टन का बम दुश्‍मन के शहर पर गिराना चाहता था लेकिन उसका यह प्रयोग भारी कीमत की वजह से असफल रहा। हालांकि तकनीक के रूप में जर्मन वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल कर ली थी। माइकल नेउफेल्‍ड कहते हैं कि इस रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में जाने के लिए रॉकेट या मिसाइल की दुनिया में नए दरवाजे खुले। अमेरिका और रूस ने हिटलर की 'खोज' पर किया कब्‍जा विश्‍वयुद्ध के बाद अमेरिका और रूस दोनों ने ही जर्मनी के वी-2 रॉकेट पर ज्‍यादा से ज्‍यादा कब्‍जा कर लिया ताकि वे इसका अध्‍ययन करके उसे वे और ज्‍यादा बेहतर बना सकें। अमेरिका पहले वी-2 जैसे हथियार से खुद को बचाने के लिए प्रयास कर रहा था और उसके बाद अपना खुद का वी-2 राकेट बनाना चाहता था। वी-2 रॉकेट के ऊपरी हिस्‍से में वैज्ञानिक उपकरण लगाने का अमेरिकी प्रयास बहुत चुनौतीपूर्ण रहा। इस पर कैमरे लगाए गए लेकिन उनके धरती पर गिरने पर ढूढ़ना बेहद मुश्किलभरा था। उस समय जीपीएस या जर्मन रॉकेट के लिए पैराशूट नहीं थे। अमेरिका को 13वें प्रयास में अंतरिक्ष से धरती की अद्भुत तस्‍वीर खींचने में सफलता मिली।


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