वॉशिंगटन धरती पर अथाह जल के स्रोत अंटार्कटिका के तबाही लाने वाले ग्लेशियर थवेट्स में दरार आना शुरू हो गया है। यह ग्लेशियर 170,312 किमी लंबा है जो अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के बराबर है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 5 साल में यह ग्लेशियर टूट जाएगा जिससे दुनियाभर के समुद्र में जलस्तर 25 इंच तक बढ़ जाएगा। इससे मुंबई जैसे दुनिया के तटीय शहरों के कई इलाके पानी में डूब सकते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि इस थवेट्स ग्लेशियर में आ रही दरार की गति बहुत ज्यादा है। इस बर्फ से निकला पानी वैश्विक स्तर पर समुद्र में जलस्तर में कुल बढ़ोत्तरी का 4 प्रतिशत होगा। सोमवार को जारी ताजा आंकड़े के मुताबिक समुद्र का गर्म होता पानी थवेट्स ग्लेशियर की पकड़ को अंटार्कटिका से कमजोर कर रहा है। इससे ग्लेशियर की सतह पर क्रैक आ रहे हैं। इस संबंध में सैटलाइट आंकड़ों को अमेरिकन जिओफिजिकल यूनियन की वार्षिक बैठक में पेश किया गया है। वैश्विक स्तर पर समुद्र का जलस्तर 25 फीसदी तक बढ़ेगा इसमें दिखाई दे रहा है कि ग्लेशियर में कई विशाल और तिरछी दरारें हैं। शोधकर्ताओं ने कहा, 'अगर तैरते हुए बर्फ की चट्टान टूटती है तो थवेट्स ग्लेशियर से वैश्विक स्तर पर समुद्र का जलस्तर 25 फीसदी तक बढ़ जाएगा। विशेषज्ञ प्रफेसर टेड स्काबोस ने बीबीसी से बातचीत में कहा, 'ग्लेशियर के मोर्चे पर संभवत: 1 दशक से भी कम समय में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। विभिन्न शोध इस दिशा में इशारा करते हैं। यह थवेट्स ग्लेशियर के टूटने की रफ्तार को तेज करेंगे और उसे विस्तृत करेंगे। इस शोध को करने वाले ओरेगांव स्टेट यूनिवर्सिटी के शोध दल के मुखिया इरिन पेट्टिट ने कहा कि जैसे कार के आगे के शीशे में हल्का सा झटका लगने पर वह कई टुकड़ों में बंट जाता है, कुछ उसी तरह से यहां भी है। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक स्तर पर समुद्र के जलस्तर में तीन गुना रफ्तार से तेजी आएगी। यही नहीं इस ग्लेशियर के टूटने के बाद और ज्यादा ग्लेशियर अंटार्कटिका से अलग होंगे। एक शोध के मुताबिक 1980 के दशक से लेकर अब तक कम से कम 600 अरब टन बर्फ नष्ट हो चुकी है।
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