वॉशिंगटन लद्दाख में चल रहे तनाव के बीच चीन ने पिछले महीने भारत से लगती सीमा पर लंबी दूरी तक मार करने वाले रणनीतिक बॉम्बर तैनात कर दिए हैं। चीन के इस कदम से अमेरिका टेंशन में आ गया है। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने हिमालयी इलाके में चीनी सैन्य तैनाती पर चिंता जताई है। भारतीय सीमा पर यह चीनी सैन्य तैनाती कुछ उसी तरह से है जैसे हिंद प्रशांत क्षेत्र में फिलीपीन्स को डराने के लिए चीन ने अपने घातक विमान तैनात कर रखे हैं। चीन बडे़ पैमाने पर एयरपोर्ट और सड़कें भी भारतीय सीमा पर बना रहा है। पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी पत्रिका फॉरेन पॉलिसी से बातचीत में कहा कि चीन का बॉम्बर तैनात करना एक तरह से भारत के लिए चेतावनी की तरह से है। रिपोर्ट में कई विशेषज्ञों की राय दी गई है जिसमें कहा गया है कि भारत चीन की सेना के आक्रामक व्यवहार के आगे मजबूती से टिका रहेगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर के विपरीत चीन को उसके घुसपैठ के खिलाफ भारत के कड़े राजनयिक और सैन्य प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। 'अमेरिका सक्रिय रूप से भारत को खुफिया सूचनाएं साझा कर रहा' एशियाई मामलों के विशेषज्ञ जेफ स्मिथ कहते हैं कि यह स्पष्ट है कि चीन अपनी उन सभी सीमाओं पर बहुत ज्यादा आक्रामक हो गया है जहां पर उसका सीमा विवाद चल रहा है। भारत की सीमा पर चीन को सबसे ज्यादा प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय चीनी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे और न ही डरेंगे। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका भारत को और ज्यादा सैन्य सहायता देगा या नहीं। एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि अमेरिका सक्रिय रूप से भारत को खुफिया सूचनाएं साझा कर रहा है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि चीन ने पिछले कई महीने से सीमा पर बड़े पैमाने पर सैनिकों को तैनात कर रखा है। यही नहीं चीनी सैनिक लगातार इलाके में युद्धाभ्यास कर रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि चीन लगातार अपनी सैन्य और परमाणु ताकत को बढ़ा रहा है। यह उसके अनुमान से ज्यादा तेजी से हो रहा है। चीन ने हाल ही में अंतरिक्ष से हाइपरसोनिक मिसाइल दागने का परीक्षण किया था। चीन के पास साल 2027 तक 700 परमाणु बम हो सकते हैं। चीन का इरादा इसे 1000 तक पहुंचाने का है।
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