बमाको (माली) फ्रांसीसी सेना मंगलवार रात को अफ्रीकी देश माली के टिम्बकटू शहर से रवाना हो गई। फ्रांसीसी सैनिकों ने उत्तरी माली में स्थित टिम्बकटू शहर के सैन्य अड्डे को खाली कर दिया है। माली फ्रांस का उपनिवेश रह चुका है और इस्लामी चरमपंथियों को खदेड़ने के लिए करीब नौ साल पहले फ्रांस ने अपनी सेना को वहां पर भेजा था। फ्रांस के इस कदम पर सवाल उठने लगे हैं और कहा जा रहा है कि क्या माली की सेना खुद कार्रवाई कर चरमपंथियों को रोक पाने में सक्षम है। वह भी तब जब आतंकियों ने साल 2013 के हमले के बाद से खुद को मजबूत किया है और देश के दक्षिणी इलाके में अपनी पहुंच को बढ़ाया है। इस खतरे के बीच फ्रांस की सेना ने मंगलवार रात को एक बयान जारी करके दावा किया कि माली की सेना की ‘टिम्बकटू में अच्छी पकड़ है।’ इसके अतिरिक्त वहां संयुक्त राष्ट्र के करीब 2200 शांतिरक्षक भी स्थायी रूप से तैनात हैं। फ्रांस ने अपने माली मिशन पर 5100 सैनिकों को तैनात किया करीब नौ साल पहले फ्रांस ने माली में सैन्य हस्तक्षेप का ऐलान किया था। अब फ्रांसीसी सैनिकों ने टिम्बकटू के इस प्रमुख सैन्य अड्डे को माली की सेना को सौंप दिया है। इसके साथ ही अब इस पश्चिमी अफ्रीकी देश में फ्रांस का सैन्य हस्तक्षेप खत्म होने जा रहा है। फ्रांस ने अपने माली मिशन पर 5100 सैनिकों को तैनात किया था जो साहेल इलाके में मौजूद थे। इस दौरान स्थानीय सरकार और वहां की बेहद कमजोर सेना की मदद की गई ताकि वे इस्लामिक आतंकियों का मुकाबला कर सकें। इस्लामी आतंकियों के हमले में हजारों लोग मारे गए हैं। फ्रांसीसी सेना ने 8 साल पहले टिम्बकटू शहर को जिहादियों से मुक्त कराया था। इस दौरान सड़कों पर स्थानीय लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया था। टिम्बकटू शहर की पत्रकार येहिया टंडानिया कहती हैं, 'जब हमारा शहर आजाद हुआ था तब लोग भावुक हो गए थे, महिलाएं रो पड़ी थीं। युवा चिल्ला रहे थे और मैं खुद भी अभिभूत थी। हालांकि पिछले कुछ दिनों से फ्रांसीसी सेना के खिलाफ माली में विरोध बढ़ रहा था। आतंकी हमले कर रहे थे जिससे यहां पर फ्रांस के खिलाफ भावनाएं भड़क रही थीं।
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