काठमांडू चीन और नेपाल के बीच बनने वाला रेलवे लिंक हिमालय की पहाड़ियों में सुरक्षित इलाके से गुजर सकता है। प्रॉजेक्ट से जुड़े एक सीनियर इंजिनियर ने यह जानकारी दी है। 8 अरब डॉलर के इस प्रॉजेक्ट की मदद से नेपाल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित जोन में बड़े स्तर पर निर्माणकार्य चीनी कानून के खिलाफ है। हिमालय से गुजरेगा टनल साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच एक हजार किमी सीमा पर 6 रूट प्रस्तावित हैं। इनमें से किसे चुनना है इसे लेकर चीनी एक्सपर्ट बंटे हुए हैं। सबसे ज्यादा विवाद माउंट कोमोलंगमा नैशनल पार्क पर है जहां माउंट एवरेस्ट स्थित है। यह एक प्रोटेक्शन जोन है। आखिरकार इस रास्ते से 30 किलोमीटर के एक टनल से रेलवे के गुजरने का फैसला किया गया। चीनी रेलवे फर्स्ट सर्वे ऐंड डिजाइन इंस्टिट्यूट ग्रुप के लीड इंजिनियर के मुताबिक टनल का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा नैशनल पार्क के प्रोटेक्शन जोन में आएगा लेकिन यह पूरी तरह अंडरग्राउंड होगा। यह चीन के क्षेत्र में आएगा और हिमालय से होकर गुजरने वाला पहला टनल होगा जो तिब्बत और नेपाल की राजधानी काठमांडू को जोड़ेगा। भारत ने किया है विरोध इस प्रॉजेक्ट का भारत ने विरोध किया है। भारत नेपाल के साथ सबसे ज्यादा व्यापार करता है लेकिन चीन हाल के सालों में आगे निकल रहा है। नेपाल चीन और भारत के बीच बफर जोन का काम भी करता है। दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बना रहता है और एक साल पहले घातक हिंसा भी हुई थी। वहीं, नेपाल के साथ चीन ने नजदीकियां बढ़ाई हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके जरिए चीन भारत को भी चुनौती देना चाहता है और नेपाल के संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहता है।
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