মঙ্গলবার, ৮ জুন, ২০২১

दुनिया में पहली बार टैंकर ड्रोन से लड़ाकू विमान में की गई एयर रिफ्यूलिंग, अमेरिका के कारनामे से सब हैरान

वॉशिंगटन ने चार जून को मानवरहित ड्रोन टैंकर के जरिए हवा में F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान में ईंधन भरकर इतिहास रच दिया है। अमेरिका के इस तकनीकी प्रदर्शन से पूरी दुनिया हैरान है। दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ड्रोन से लड़ाकू विमान में एयर रिफ्यूलिंग की गई है। इसमें जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया गया वह बोइंग का MQ-25 स्टिंग्रे है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। इसलिए अमेरिका के लिए है बड़ी बात इस टेस्ट को इलिनोइस के मस्कौटा में मिडअमेरिका हवाई अड्डे से कुछ ही दूरी पर हवा में अंजाम दिया गया। इस ड्रोन को अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर्स से ऑपरेट किए जाने की योजना है। इससे लड़ाकू विमानों को रिफ्यूलिंग के लिए बार-बार एयरक्राफ्ट कैरियर पर उतरने की जरूरत नहीं होगी। दरअसल, एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान के दौरान लड़ाकू विमान अपनी पूरी ईंधन क्षमता का उपयोग नहीं कर पाते हैं। ऐसे में लड़ाकू विमानों को ईंधन के लिए बार-बार एयरक्राफ्ट कैरियर पर लैंडिंग करनी पड़ती है। एयरक्राफ्ट कैरियर पर कम होंगी दुर्घटनाएं एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरना और लैंडिंग करना बहुत जोखिम वाला काम माना जाता है। ऐसे में इस ड्रोन की मदद से अब हवा में ही लड़ाकू विमानों को ईंधन दिया जा सकेगा। इससे अमेरिकी नौसेना के एफए 18 सुपर हॉर्नेट बेड़े को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। बार-बार उड़ान भरने और लैंडिंग करने से बचने के कारण लड़ाकू विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने का चांस भी कम हो जाएंगे। बोइंग के ड्रोन डॉयरेक्टर ने बताया पूरा घटनाक्रम बोइंग के MQ-25 प्रोग्राम के डॉयरेक्टर डेव बुजॉल्ड ने बताया कि टेस्टिंग के दौरान नेवी के एक सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने बोइंग के स्वामित्व वाले MQ-25 T1 टेस्टिंग व्हीकल से संपर्क किया। इस ड्रोन से 20 फीट की दूरी तक पहुंचने के बाद लड़ाकू विमान के पायलट ने आसपास के माहौल का अंदाजा लिया। वह चेक करना चाहते थे कि इस ड्रोन के पास उड़ान भरना कितना स्थिर है। ड्राई कनेक्ट कर जांच के बाद भरा फ्यूल जब पायलट ने अपनी सतर्क आंखों से निरीक्षण पूरा कर लिया तब ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर तैनात यूएवी ऑपरेटर ने फ्यूल इजेक्ट करने वाली नली (एरियल रिफ्यूलिंग स्टोर पॉड) को ऑन किया। इसके बाद 20 फीट की दूरी पर उड़ान भर रहा लड़ाकू विमान और करीब आया। इस दौरान सुपर हॉर्नेट ने एक बार ईंधन भरने वाली नली से ड्राई कनेक्ट भी किया। इस दौरान लड़ाकू विमान में कोई ईंधन नहीं भरा गया। अलग-अलग ऊंचाई पर की गई एयर रिफ्यूलिंग दूसरे प्रयास में विमान ने फिर से यूएवी के ईंधन वाली नली एरियल रिफ्यूलिंग स्टोर पॉड से कनेक्ट किया। तब दोनों विमान जमीन से 10000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर रहे थे। इस दौरान MQ-25 यूएवी ने 300 पाउंड ईंधन की सप्लाई की। ठीक ऐसा ही कारनामा 16000 फीट की ऊंचाई पर भी किया गया। इस दौरान ड्रोन ने लड़ाकू विमान को 100 पाउंड ईंधन सप्लाई किया।


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