বুধবার, ২৩ জুন, ২০২১

नीरव मोदी को ब्रिटिश कोर्ट से एक और झटका, खारिज की भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ अर्जी

लंदन ब्रिटिश हाईकोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी की भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। पंजाब नेशनल बैंक के 14000 रुपये के धोखाधड़ी के आरोपी नीरव मोदी ने लंदन हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी। इसी साल 15 अप्रैल को ब्रिटिश ग्रह सचिव प्रीति पटेल ने नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित किए जाने को अपनी मंजूरी दी थी। नीरव में अपील में क्या लिखा था? इससे पहले 25 फरवरी को ब्रिटेन के वेस्टमिनिस्टर कोर्ट के डिस्ट्रिक्ट जज नें नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के मामले में फैसला दिया था। नीरव मोदी ने इसे चुनौती देने के लिए ब्रिटेन के हाईकोर्ट में एक अपील दायर की थी। नीरव मोदी की याचिका में भारत में उचित मुक़दमा नहीं चलने और राजनीतिक कारणों से उन्हें निशाना बनाने की चिंता जाहिर की थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि भारत में जेलों की स्थिति खराब है और उसके खिलाफ सबूत कमजोर हैं। 180 करोड़ डॉलर का मालिक है नीरव मोदी फोर्ब्स के मुताबिक 2017 में नीरव मोदी की कुल दौलत 180 करोड़ डॉलर (करीब 11, 700 करोड़ रुपए) थी। नीरव मोदी की कंपनी का मुख्यालय मुंबई में है। मार्च 2018 में नीरव मोदी ने न्यूयॉर्क में बैंकरप्सी प्रोटेक्शन के तहत याचिका दायर की थी। 19 मार्च 2019 को गिरफ्तार हुआ था नीरव मोदी नीरव मोदी को प्रत्यर्पण वारंट पर 19 मार्च 2019 को गिरफ्तार किया गया था और प्रत्यर्पण मामले के सिलसिले में हुई कई सुनवाइयों के दौरान वह वॉन्ड्सवर्थ जेल से वीडियो लिंक के जरिये शामिल हुआ था। कोर्ट पहले भी नीरव के जमानत के कई अर्जियों को खारिज कर चुका है। नीरव मोदी पर क्या है आरोप नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला करने का आरोप है। यह धोखाधड़ी गारंटी पत्र के जरिए की गई। उस पर भारत में बैंक घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दो प्रमुख मामले सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज किए हैं। सीबीआई और ईडी के अनुरोध पर ब्रिटेन से उसका प्रत्यर्पण अगस्त, 2018 में मांगा गया था। घोटाले के बाद भारत से भागने वाला नीरव मोदी इस समय लंदन की एक जेल में बंद है।


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