मॉस्को रूस अपनी नौसैनिक ताकत को बढ़ाने के लिए स्टील्थ तकनीकी से लैस युद्धपोत का निर्माण कर रहा है। के अधिकारियों ने बताया है कि यह युद्धपोत अगले साल के पहले तीन महीनों में कमीशन किया जा सकता है। इस युद्धपोत के शामिल होते ही रूसी नौसेना की ताकत बहुत बढ़ जाएगी। यूरोप और आर्कटिक में रूस के साथ सैन्य प्रतिस्पर्धा में लगे अमेरिका के लिए यह युद्धपोत समस्या खड़ी कर सकता है। दुश्मनों के रडार नहीं पकड़ पाएंगे रूस की सरकारी मीडिया आरआईए का दावा है कि मरकरी नेवल कार्वेट युद्धपोत को दुश्मन के जहाजों में लगे रडार पकड़ नहीं पाएंगे। प्रॉजेक्ट 20386 से जुड़े इस युद्धपोत का निचला हिस्सा काफी समय पहले ही बनकर तैयार हो चुका है। इसके ऊपर के भाग का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। एक बार पूरी तरह से तैयार होने के बाद इसे कुछ महीनों के लिए समुद्री परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। अगले साल औपचारिक रूप से शामिल होगा यह युद्धपोत रूसी मीडिया ने बताया है कि मरकरी स्टील्थ युद्धपोत को अगले साल नौसेना में शामिल किया जा सकता है। यह युद्धपोत क्रूज मिसाइलों, एंटी एयरक्राफ्ट गन और अत्याधुनिक तोप से लैस होगा। इतना ही नहीं, पानी के सैकड़ों मीटर नीचे मौजूद दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए भी इसमें सोनार समेत कई तरह के अडवांस उपकरण लगाए गए हैं। युद्धपोत पर की गई है रडार सिग्नल सोखने वाली कोटिंग क्रेमलिन के मुखपत्र ने दावा किया है कि इस युद्धपोत पर रडार की तरंगों को सोखने वाले मटेरियल से कोटिंग की गई है। इसके अलावा मरकरी की डिजाइन ऐसे की गई है, जिससे दुश्मनों के रडार की तरंगे या तो पार निकल जाएंगी या फिर अवशोषित कर ली जाएंगी। जब रडार से निकली तरंगे किसी ऑब्जेक्ट से टकराकर वापस लौटती हैं तब उस ऑब्जेक्ट की लोकेशन और आकार का पता चलता है। रूस ने नौसेना में किया है भारी निवेश व्लादिमीर पुतिन ने हाल के वर्षों में रूसी नौसेना में भारी निवेश किया है। इसके बावजूद रूसी रक्षा मंत्रालय की कई परियोजनाएं अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के कारण अधर में लटकी हुई हैं। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद से ही यूरोपीय देशों के साथ रूस के संबंध सही नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, रूस का नया जंगी जहाज कैलिबर क्रूज मिसाइलों से लैस होगा।
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