वॉशिंगटन ऐस्ट्रोनॉमर्स को सौर मंडल के किनारे कुछ अजीबोगरीब दिखा है। यह एक 'महाधूमकेतु' है जो धरती की ओर आ रहा है। यह क्या है, इसे लेकर अभी स्टडी की जा रही है क्योंकि इसे हाल ही में खोजा गया है। 2014-2018 के बीच डार्क एनर्जी सर्वे के डेटा की मदद से इसे खोजा गया है। इस विशाल ऑब्जेक्ट को नाम दिया गया है। एक चक्कर पूरा करने में लाखों साल अभी तक के आकलन में इसे 100-370 किलोमीटर लंबा माना जा रहा है। इसकी खासियत इसकी कक्षा भी है। अनैलेसिस के मुताबिक यह ऑब्जेक्ट धरती के पास जाता है और फिर Oort cloud में आ जाता है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां सौर मंडल का चक्कर काटने वाली गैस और धूल होती है। इसे अपनी कक्षा में एक चक्कर पूरा करने में कुछ दिन नहीं, बल्कि 6.12 लाख साल लगते हैं। अभी यह सूरज से 22 ऐस्ट्रोनॉमिकल यूनिट की दूरी पर है। यह धरती से सूरज की दूरी का 22 गुना होता है। हालांकि, पिछले सात साल में यह हर साल एक AU की दूरी तय कर रहा है। क्या होते हैं धूमकेतु? धूमकेतु भी (Asteroids) की तरह सूरज का चक्कर काटते हैं लेकिन वे चट्टानी नहीं होते बल्कि धूल और बर्फ से बने होते हैं। जब ये धूमकेतु सूरज की तरफ बढ़ते हैं तो इनकी बर्फ और धूल वेपर यानी भाप में बदलते हैं जो हमें पूंछ की तरह दिखता है। खास बात ये है कि धरती से दिखाई देने वाला कॉमट दरअसल हमसे बेहद दूर होता है।
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