इस्लामाबादपाकिस्तान में एक हिंदू लड़की ने इतिहास रच दिया है। सना पाकिस्तान की पहली हिंदू महिला सरकारी अधिकारी बनने जा रही हैं। सना ने पाकिस्तान का प्रतिष्ठित पब्लिक सर्विस एग्जाम Central Superior Services (CSS) दिया और पहले ही प्रयास में उन्हें कामयाबी हासिल हुई। इस परीक्षा को पाकिस्तान की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक माना जाता है। डॉक्टरी छोड़ बनीं सरकारी अधिकारीप्रशासनिक सेवा में चयन एग्जाम के रिजल्ट के आधार पर होता है। यह सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन ऑफ इंडिया की तरह ही है, जिसका आयोजन संघ लोक सेवा आयोग द्वारा किया जाता है। हालांकि करियर को लेकर सना की शुरुआती योजना कुछ और थी। मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि उसके माता-पिता चाहते थे कि वह मेडिकल के क्षेत्र में अपना करियर बनाएं। साल 2016 में सना ने शहीद मोहतरमा बेनजीर भुट्टो मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। अस्पताल की हालत बेहद खराबउन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई Urologist के रूप में जारी रखी और बाद में संघीय लोक सेवा आयोग में चयनित हो गईं। सना के हवाले से द टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा, 'जब मैंने अपनी ट्रेनिंग शुरू की तो कुछ महीने के लिए मेरी पोस्टिंग शिकारपुर के लखी के तालुका अस्पताल में महिला चिकित्सा अधिकारी के रूप में हुई। सिंध के ग्रामीण इलाकों में सामुदायिक स्वास्थ्य की स्थिति बेहद खराब है।' समाज में बदलाव लाना है उद्देश्यउन्होंने कहा, 'मैं हर रोज मरीजों को देखती थी लेकिन न ही उन्हें देने के लिए दवाइयां उपलब्ध थीं और न ही उन्हें भर्ती करने की व्यवस्था थी। यहां तक की कुछ मामूली दवाइयां जैसे टिटनेस और एंटी-रेबीज की भी कमी थी। इस तरह की व्यवस्था ने मेरे मन में सरकारी अस्पताल के उद्देश्य को लेकर सवाल खड़े किए।' रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में जब शिकारपुर के डेप्युटी कमिश्नर ने अस्पताल का दौरा किया तो सना ने देखा कि सभी काम करना चाहते हैं और अस्पताल की कमियों को दूरी करना चाहते हैं। तभी उन्होंने सिविल सर्विस में करियर बनाने और समाज में बदलाव लाने का फैसला लिया।
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