মঙ্গলবার, ২১ সেপ্টেম্বর, ২০২১

क्‍वॉड बैठक में बनेगा चीन को चौतरफा घेरने का मास्‍टरप्‍लान, बाइडन से मिलेंगे मोदी, सुगा और मॉरिसन

वॉशिंगटन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीनी ड्रैगन की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी शुक्रवार को अमेरिका में राष्‍ट्रपति जो बाइडन से मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी की बाइडन से यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिका ने ऑस्‍ट्रेलिया के साथ परमाणु पनडुब्‍बी और टॉमहॉल्‍क मिसाइलों का ऐतिहासिक ऑकस (AUKUS) समझौता किया है। अमेरिका, ब्रिटेन ने ड्रैगन की आक्रामकता पर लगाम लगाने के लिए ऑस्‍ट्रेलिया के साथ समझौता किया है। अब बाइडन- पीएम मोदी और क्‍वॉड देशों के अन्‍य नेताओं के साथ बैठक के दौरान चीन पर वज्रपात करने के महाप्‍लान को अमलीजामा पहनाया जा सकता है। भारत के लिए यह मुलाकात आर्थिक और रक्षा संबंधों के ल‍िहाज से बेहद अहम साबित होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति के साप्ताहिक कार्यक्रम के अनुसार 24 सितंबर, शुक्रवार को ही बाइडन प्रधानमंत्री मोदी, जापानी पीएम सुगा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ वाइट हाउस में पहली बार व्यक्तिगत रूप से क्‍वॉड नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करेंगे। माना जा रहा है कि ये नेता चीन के खिलाफ अपने संसाधनों को एकजुट करके एक-दूसरे की मदद करने पर चर्चा करेंगे। हालांकि इसकी शुरुआत पहले ही हो चुकी है और अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया, जापान और भारत कोरोना वैक्‍सीन को लेकर एक महाडील पर काम कर रहे हैं। अर्थव्‍यवस्‍था में करेंगे मदद, चीनी वैक्‍सीन को मिलेगी टक्‍कर इसके तहत भारतीय कंपनियों को अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वैक्‍सीन की एक अरब वैक्‍सीन डोज बनाने की अनुमति मिल सकती है। इसके अलावा क्‍वॉड देशों ने सेमी कंडक्‍टर की सुरक्षित सप्‍लाइ के लिए मिलकर काम करने का फैसला किया है। इस बारे में शुक्रवार को औपचारिक ऐलान हो सकता है। इस ऐलान से चीन को कड़ी चुनौती मिल सकती है जो अपनी दोयम दर्जे की वैक्‍सीन से दुनिया में प्रभाव बढ़ाने में जुटा हुआ है। चीन की वैक्‍सीन से दुनिया के कई देश परेशान हैं लेकिन उनके पास विकल्‍प नहीं है। अब भारत चीन का विकल्‍प बन सकता है। भारत ने वैक्‍सीन के निर्यात का ऐलान भी कर दिया है। माना जा रहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के 33 देशों को सबसे पहले वैक्‍सीन का निर्यात होगा ताकि चीन के प्रभाव को कम किया जा सके। यही नहीं देश हित के लिए जरूरी हार्डवेयर, साफ्टवेयर और सर्विसेज पर बातचीत में सबसे ज्‍यादा तवज्‍जो दी जा सकती है। सेमीकंडक्‍टर के महत्‍व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह दुनिया के अरबों प्रॉडक्‍ट का 'दिल' है। इसमें स्‍मार्टफोन, डाटा सेंटर, कंप्‍यूटर, लैपटॉप, टैबलेट, घरेलू सामान, जीवनरक्षक दवाएं आदि शामिल हैं। चीन को चौतरफा घेरने की तैयारी, तय होगी क्‍वॉड की भूमिका क्‍वॉड की इस शीर्ष बैठक में चीनी ड्रैगन को चौतरफा घेरने की रणनीति बन सकती है। माना जा रहा है कि क्‍वॉड में शामिल चारों देशों अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्‍ट्रेलिया अपनी नौसेना का विस्‍तार करेंगे ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को लगाम लगाया जा सके। यही नहीं समान सोच वाले अन्‍य देशों जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया आदि के साथ सैन्‍य समझौता भी करने पर जोर दिया जा सकता है। अमेरिका ने ब्रिटेन और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ मिलकर एक महागठबंधन ऑकस बनाया है। इस सैन्‍य गठबंधन का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के किसी भी दुस्‍साहस का करारा जवाब देना है। क्‍वॉड के सदस्‍य देश जल्‍द ही मालाबार अभ्‍यास के जरिए एक साथ आने जा रहे हैं। इस अभ्‍यास में भारत, जापान, अमेरिका के अलावा अब ऑस्‍ट्रेलिया भी हिस्‍सा लेने जा रहा है। यह इस साल जापान के पास प्रशांत महासागर में होने जा रहा है जो इन दिनों चीन के साथ तनाव का केंद्र बना हुआ है। यही नहीं हाल ही में भारत और अमेरिका ने दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के साथ सैन्‍य अभ्‍यास किया है। इसके जरिए दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का आत्‍मविश्‍वास बढ़ाने की कोशिश की गई जो अभी चीन से सीधी टक्‍कर लेने से बचते हैं। अफगानिस्‍तान पर हो सकती है अहम चर्चा पीएम मोदी और बाइडन की मुलाकात और क्‍वॉड देशों की बैठक के दौरान अफगानिस्‍तान में तालिबान राज पर अहम चर्चा हो सकती है। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है। भारत को डर सता रहा है कि अफगानिस्‍तान एक बार फिर से आतंकियों के लिए सुरक्ष‍ित पनाहगार हो सकता है। ये आतंकी भारत पर हमले कर सकते हैं। यही नहीं अब अफगानिस्‍तान में चीन के पैर पसारने की आशंका बढ़ती ही जा रही है। चीन के जासूसों ने अफगानिस्‍तान के बगराम हवाई ठिकाने का गोपनीय दौरा किया है। माना जा रहा है कि चीन बगराम एयरबेस पर अपना जासूसी केंद्र बनाना चाहता है। जानिए क्या है क्‍वॉड, कैसे अस्तित्‍व में आया द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। हालांकि इसकी शुरुआत वर्ष 2004-2005 हो गई जब भारत ने दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में आई सुनामी के बाद मदद का हाथ बढ़ाया था। क्‍वाड में चार देश अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द. कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे। चीन लगातार कर रहा है क्‍वॉड का विरोध इस समूह के गठन के बाद से ही चीन चिढ़ा हुआ है और लगातार इसका विरोध कर रहा है। लद्दाख में चल रहे सैन्‍य तनाव के बीच चीन का सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स भारत को लगातार धमकी दे रहा है। साथ ही नसीहत दे रहा है कि भारत क्‍वॉड से दूर रहे और गुटन‍िरपेक्षता की अपनी नीति का पालन करे। चीनी विदेश मंत्री वांग यी हमेशा से ही क्‍वॉड का मजाक उड़ाते रहे हैं। उन्होंने पहले कहा था कि क्‍वॉड कूड़े में फेंकने वाला आइडिया है। यह आइडिया समुद्री झाग की तरह खुद ही खत्म हो जाएगा। हालांकि इस संगठन की दूसरी बैठक में सदस्य देशों के सकारात्मक रूख को देखकर चीन के होश उड़े हुए हैं।


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