বুধবার, ১৬ জুন, ২০২১

ग्लोबल वार्मिंग से मर रहा यह महासागर, वैज्ञानिकों की चेतावनी- अगली पीढ़ी नहीं देख पाएगी गर्मियों की बर्फ

वॉशिंगटन के बढ़ने से धरती को हुए नुकसान का स्तर अब इतना बढ़ चुका है कि उसे चाहकर भी सुधारा नहीं जा सकता। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हमारी अगली पीढ़ी में गर्मियों में जमने वाली बर्फ शायद नहीं देख पाएगी। उत्तरी ध्रुव पर स्थित इस महासागर का अधिकतर हिस्सा पहले गर्मियों में भी जमा हुआ रहता था। ग्लोबल वार्मिंग ने इस इलाके में समुद्री पानी के बर्फ जमने की रफ्तार को काफी धीमा कर दिया है। अगली पीढ़ी नहीं देख पाएगी आर्कटिक की बर्फ आर्कटिक में अबतक के सबसे बड़े अभियान का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक मार्कस रेक्स ने चेतावनी दी है कि हमारी अगली पीढ़ी आर्कटिक महासागर के गर्मियों की बर्फ को नहीं देख पाएगी। मार्कस रेक्स ने उत्तरी ध्रुव पर दुनिया के सबसे बड़े मिशन का नेतृत्व किया है। इसमें 20 देशों के 300 से भी ज्यादा वैज्ञानिक शामिल थे, जिन्होंने आर्कटिक में कई शोध भी किए हैं। ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को खत्म करना अब नामुमकिन जर्मनी की राजधानी बर्लिन में इस अभियान के पहले निष्कर्षों को दुनिया के सामने रखते हुए मार्कस ने कहा कि शोधकर्ताओं ने पाया है कि आर्कटिक की बर्फ पहले से कहीं ज्यादा तेजी से पीछे हट रही है। आर्कटिक में गर्मियों की समुद्री बर्फ का गायब होना किसी खदान में पहले बारूदी सुरंग का विस्फोट करने के समान है। जब हम ग्लोबल वार्मिंग को दूर ढकेलने की कोशिश करते हैं तो यह हमारे और करीब आ जाती है। अगले 10 साल में बर्फ मुक्त हो जाएगा आर्कटिक 12 अरब रुपयों के बजट वाले इस अभियान में शामिल वैज्ञानिकों ने 389 दिन आर्कटिक में गुजारे। यह टीम पिछले साल अक्टूबर में वापस जर्मनी लौटी थी। इस टीम ने इकट्ठा किए गए 15 टेराबाइट डेटा और 1000 से अधिक बर्फ के नमूनों का विश्लेषण कर मंगलवार को पहली रिपोर्ट जारी की है। जिसमें बताया गया है कि आर्कटिक महासागर धीरे-धीरे मर रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 10 साल में आर्कटिक महासागर गर्मियों की बर्फ से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। 1890 की तुलना में 10 डिग्री ज्यादा तापमान अभियान के दौरान एकत्र किए गए डेटा में वातावरण, महासागर, समुद्री बर्फ और पारिस्थितिक तंत्र पर रीडिंग शामिल है। रेक्स ने कहा कि वैज्ञानिकों ने पाया कि आर्कटिक महासागर की बर्फ 2020 के वसंत में काफी पीछे हट गई है। आज से 10 साल पहले की स्थिति से तुलना की जाए तो यह आधी से भी कम है। 1890 के दशक में खोजकर्ता और वैज्ञानिकों फ्रिड्टजॉफ नानसेन और हजलमार जोहानसन द्वारा किए गए फ्रैम अभियान की तुलना में बर्फ केवल आधी मोटी थी और तापमान भी 10 डिग्री अधिक था।


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