वॉशिंगटन संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ ने अमीर देशों के समूह जी7 को चेतावनी दी है कि वे अपनी बची हुई कोरोना वायरस खुराक को गरीब देशों को दान करें, नहीं तो वे खराब हो जाएंगी। संस्था ने कहा कि पूरे साल कोरोना वायरस वैक्सीन की तेजी से सप्लाइ की जरूरत है क्योंकि गरीब देशों के पास इतना संसाधन नहीं है कि वे एक बार में सारी वैक्सीन का इस्तेमाल कर लें। यूनिसेफ की इस अपील को बॉलीवुड स्टार प्रियंका चोपड़ा समेत कई नामचीन हस्तियों ने अपना समर्थन दिया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन और कई अन्य देशों ने वादा किया है कि वे अपनी बची हुई कोरोना वायरस वैक्सीन को दान करेंगे लेकिन उन्होंने जल्दी कोरोना वायरस वैक्सीन की आपूर्ति करने पर कोई आश्वासन नहीं दिया है। डेविड बेकहम, प्रियंका चोपड़ा जैसे स्टार्स ने एक पत्र लिखकर जी7 देशों से अगस्त महीने तक 20 प्रतिशत कोरोना वैक्सीन को गरीब देशों को दान करने की मांग की है। बेकहम ने कहा, 'महामारी तब नहीं जाएगी जब तक कि इसका हर जगह से खात्मा नहीं हो जाता है।' यूनिसेफ की वैक्सीन लीड लिली कर्पानी ने बीबीसी से कहा कि गरीब देशों को अपनी जनता को ठीक उसी समय वैक्सीन लगाने की जरूरत है जब दुनिया के अन्य देश इसे लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक स्थिति में बिना किसी संदेह के 18 साल के अंदर के बच्चों को भी वैक्सीन लगाना होगा। कोविड टीके की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत: अमेरिका इस बीच अमेरिका के विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने कहा कि दुनिया भर में क्षेत्रीय आधार पर कोविड-19 रोधी टीके की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। उनका बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत सहित कई देशों को अमेरिका लाखों टीके भेज रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने घोषणा की है कि अमेरिका अपने कोविड-19 रोधी टीकों के भंडार में उपयोग में नहीं लाई गई ढाई करोड़ खुराक में से करीब 1.9 करोड़ यानी 75 प्रतिशत खुराक संयुक्त राष्ट्र समर्थित कोवैक्स कार्यक्रम के माध्यम से दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया तथा अफ्रीका के देशों को आवंटित करेगा। ब्लिंकन विदेश विभाग के 2022 के बजटीय प्रस्तावों पर ‘हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी’ के समक्ष कहा कि दुनिया के तीन-चौथाई लोगों का जल्द से जल्द टीकाकरण होना जरूरी है। ब्लिंकन ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘अगर हम मौजूदा स्थिति में रहे, आठ करोड़ टीकों को आवंटित करने से पहले, विश्व में उत्पादन क्षमता बढ़ाने से पहले, ना केवल अमेरिका, हम दुनियाभर के लोगों को टीके लगाने या कम से कम दुनिया के 75 प्रतिशत लोगों को 2024 तक टीके नहीं लगा पाएंगे।’ ब्लिंकन ने कहा, ‘हमें यह सुनिश्चित करना है कि जो भी हम देश से बाहर भेजें वे सुरक्षित एवं प्रभावी हों।’
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